Wednesday, May 26, 2010

धन गुरु तेघ्बहादुर साहब जी के पवित्र बोल

रे मन राम स्यूं कर प्रीत सर्वानन गोबिंद सुनो और गाओ रसना गीत
काळ भयल ज्यों पर्वो डोले मुख पसरे मीत आज काल पुन तोहे गरस है समाज राखो चीत
हे प्रभु नमस्कार है तेनु तेरा कोई मजहब नहीं तेरा कोई धर्मं नहीं न जात है न पात है न मात है
चित्हीन वित्हीं प्रकाशाही तापहीन कुलहीन बुद्धिहीन भाव्रीन

1 comment:

  1. i have written today is a sacred saying of
    guru teghbahadur saheb ji maharaj

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