रे मन राम स्यूं कर प्रीत सर्वानन गोबिंद सुनो और गाओ रसना गीत
काळ भयल ज्यों पर्वो डोले मुख पसरे मीत आज काल पुन तोहे गरस है समाज राखो चीत
हे प्रभु नमस्कार है तेनु तेरा कोई मजहब नहीं तेरा कोई धर्मं नहीं न जात है न पात है न मात है
चित्हीन वित्हीं प्रकाशाही तापहीन कुलहीन बुद्धिहीन भाव्रीन
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
i have written today is a sacred saying of
ReplyDeleteguru teghbahadur saheb ji maharaj